PM मोदी-पुतिन मुलाकात: भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने पर जोर, शांति और कूटनीति पर भी हुई चर्चा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली में अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। PM मोदी-पुतिन मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारियां चल रही हैं। बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को भारत पहुंचे। नई दिल्ली में हुई बातचीत को भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में ऊर्जा और व्यापार सहयोग लगातार चर्चा में रहा है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग पर विशेष ध्यान
बैठक में भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को आने वाले वर्षों में बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के रिश्तों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद ने पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत किया है। वैश्विक बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति का मुद्दा भारत के लिए खास महत्व रखता है।
रक्षा सहयोग भी बातचीत का अहम हिस्सा
PM मोदी-पुतिन मुलाकात में रक्षा सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई। भारत और रूस लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य उपकरणों की खरीद के अलावा कई क्षेत्रों में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग भी हुआ है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की भारत की नीति के बीच रूस के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त परियोजनाएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। BRICS सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को विस्तार देने की संभावनाओं पर भी नजर रहेगी।
वैश्विक तनाव पर भारत का शांति संदेश
बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक संघर्षों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को महत्वपूर्ण बताया। पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र में तनाव का असर समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
भारत लंबे समय से अलग-अलग देशों के साथ संवाद बनाए रखने और बातचीत के जरिए विवादों के समाधान की वकालत करता रहा है। रूस के साथ बातचीत में भी भारत का यही रुख दिखाई दिया।
मोदी और पुतिन की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने साथ में INNOPROM औद्योगिक प्रदर्शनी का दौरा किया। दोनों नेताओं का एक साथ वहां पहुंचना भारत-रूस संबंधों में आपसी विश्वास और सहयोग के संदेश के रूप में देखा गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को तमिल के प्राचीन ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भी भेंट किया। इस उपहार को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाने वाला कदम माना जा रहा है।
रूस के साथ संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?
भारत और रूस के संबंध केवल रक्षा या ऊर्जा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश व्यापार, अंतरिक्ष, तकनीक, परमाणु ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है, नई दिल्ली के लिए मॉस्को के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
BRICS के मंच पर भी भारत और रूस के बीच समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इस संगठन में अब 11 सदस्य देश हैं और इसका वैश्विक आर्थिक एवं राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है।
आगे क्या?
PM मोदी-पुतिन मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच आने वाले समय में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और तकनीकी सहयोग से जुड़े क्षेत्रों में नई पहल की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा भारत वैश्विक संघर्षों के बीच संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने की अपनी नीति पर भी कायम है।
कुल मिलाकर, नई दिल्ली में हुई मोदी-पुतिन बैठक ने भारत-रूस संबंधों की निरंतरता और रणनीतिक महत्व को एक बार फिर सामने रखा है। BRICS सम्मेलन के दौरान होने वाली आगे की चर्चाओं से दोनों देशों के संबंधों की अगली दिशा को लेकर और संकेत मिलने की उम्मीद है।
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